बैतूल 5 मई ।।देशव्यापी लॉकडाउन के तीसरे चरण में शराब की दुकानों को फिर से खोलने की छूट कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के अब तक के सभी प्रयासों पर भारी पड़ती दिख रही है। सोमवार की तरह मंगलवार को भी सड़कों और दुकानों पर लोगों की बेतहाशा भीड़ देखने को मिल रही है। शराब लेने के लिए लोग इतने व्याकुल हैं कि उन्हें न अपनी परवाह है और न ही अपनों की। शारीरिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) के सारे इंतजाम और दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। इस बीच कई राज्यों की सरकारें शराब की होम डिलीवरी पर भी गौर कर रही हैं।कोरोना लॉकडाउन के दौरान खुली शराब की दुकानो में सोमवार से लम्बी लाइने लग रही है ।वही आंध्रप्रदेश और छत्तीसगढ़ में महिलाओं ने शराब दुकानें खुलने पर विरोध भी शुरू कर दिया है ।मध्यप्रदेश में भी बुधवार सुबह से शराब की दुकानें खुलने वाली है। लॉकडाउन के तीसरे चरण में सराब की बिक्री तो शुरू कर दी जाएगी और बाक़ी कारोबार बंद हैं।ऐसे में सवाल उठ है कि शराब की बिक्री सरकारों के लिए इतनी ज़रूरी क्यों हैं।
दरअसल, शराब और पेट्रोल डीजल ये ऐसे उत्पाद हैं जिन पर राज्य सरकारें अपनी ज़रूरत के हिसाब से टैक्स लगाकर सबसे ज़्यादा राजस्व वसूलती हैं।माना जा रहा है कि राज्य सरकारों को हो रहे राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए ही लॉकडाउन के बावजूद शराब की दुकानें खोली गई हैं।परन्तु शराब की दुकाने देश भर में अब एक नई मुसीबत बन गई है ।भीड़ ने कोरोना से लड़ने के सारे नियम कायदों सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ा दी है।जो पुलिस लॉक डाउन और दूरी बनाए जाने के लिए बीते 43 दिनों से पालन करा रही थी वो अब दारूकुट्टो की लाइन लगाने में लग गई है । कोरोना वायरस के असर को रोकने के लिए जरूरी है कि लोग एक दूसरे के संपर्क में ना आएं. इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का ऐलान किया था, जिसका करोड़ों देशवासियों ने स्वागत किया। परन्तु अब हालात बदल गए है ।और सोशलमीडिया पर तरह तरह की चर्चाएं चल रही है।
पुलिस को करना पड़ा बलप्रयोग
बता दें कि 40 दिन शराब की दुकानें बंद रहने के बाद सरकार ने सोमवार को कई शर्तो के साथ इन्हें खोलने की अनुमति दी थी। सोमवार को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ और अन्य शहरों में सरकारी ठेकों पर हजारों की संख्या में लोग जुट गए। कुछ जगहों पर तो हिंसा भड़कने तक की नौबत आ गई। इसे देखते हुए कई जगहों पर प्रशासन को शराब की दुकानें बंद करने का भी एलान करना पड़ गया। बढ़ती भीड़ के कारण कुछ जगहों पर पुलिस को बलप्रयोग भी करना पड़ा।
कुछ तथ्य ये भी..
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के रिसर्च बताते है कि लॉकडाउन से पहले 16 करोड़ लोग शराब का सेवन करते थे, उनमें से तीन करोड़ लोगों को शराब की लत थी।
