मध्य प्रदेश में बिजली संकट के हालात बनते जा रहे हैं। प्रदेश के चारों बिजली संयंत्र आधी क्षमता से चलाए जा रहे हैं।
यदि संयंत्रों को पूरी क्षमता से चलाया जाए, तो प्रदेश में सिर्फ साढ़े तीन दिन का कोयला बचा है। ऐसे में कोयले का इंतजाम नहीं हुआ, तो संयंत्रों में बिजली उत्पादन प्रभावित होना तय है। चारों संयंत्रों को पूरी क्षमता से चलाने के लिए रोज 65 हजार टन कोयले की जरूरत है। जबकि वर्तमान में चारों संयंत्रों में दो लाख 21 हजार 538 टन कोयला भंडारित है, जो पूरे चार दिन भी नहीं चलेगा। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार शाम 8:30 बजे प्रदेश में 10 हजार 229 मेगावाट बिजली सप्लाई की जा रही थी । प्रदेश के चारों बिजली संयंत्र सारणी, अमरकंटक चचाई, बिरसिंहपुर पाली एवं सिंगाजी को कोयले की कमी के चलते आधी क्षमता से चलाया जा रहा है। इन संयंत्रों में वर्तमान में दो हजार 428 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इसमें से 2268 मेगावाट बिजली ग्रिड में सप्लाई की जा रही है। वहीं प्रदेश की जल विद्युत परियोजनाएं 1716 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रही हैं। सेंट्रल सेक्टर से 5983 मेगावाट बिजली की मांग की गई थी। इसके विरुद्ध प्रदेश को 5899 मेगावाट बिजली मिल रही है।