Betul News : तवा नदी से रेत खनन कर गांव में हो रहा भंडारण, रात में डंपरों से सप्लाई
Betul news today ; जिले में रेत का संकट होने का फायदा माफिया के द्वारा प्रशासन की मिलीभगत से खुलेआम उठाया जा रहा है। तवा नदी से रेत का बड़े पैमाने पर खनन कर गांव-गांव में भंडारण किया जा रहा है। रात में डंपरों के माध्यम से इसका परिवहन भी हो रहा है लेकिन खनिज और राजस्व विभाग का अमला आंखें बंद किए बैठा हुआ नजर आ रहा है। पुलिस के द्वारा ही गाहे-बगाहे रेत का अवैध परिवहन करने वाले वाहनों को पकड़कर खानापूर्ति की जा रही है। दरअसल जिले की 47 रेत खदानों का ठेका होने के बाद राशि को लेकर मामला न्यायालय में पहुंच गया है। इस पर अब तक कोई निर्णय न होने से रेत की खदानें प्रारंभ नही हो सकी हैं। इसके साथ ही रेत के भंडारण का ठेका होने के बाद ठेकेदार ने न्यायालय में याचिका दायर कर दी है। इससे भंडारित की गई रेत भी लोगों को नहीं मिल पा रही है। प्रशासन की लापरवाही से रेत माफिया को मनमानी करने का पूरा मौका मिल गया है। यही कारण है कि 1500 रुपये में मिलने वाली रेत की ट्राली छह से सात हजार रुपये में मिल रही है, वहीं एक डंपर रेत की कीमत 50 से 60 हजार रुपये पर पहुंच गई है। कई गुना दाम मिलने के कारण रेत माफिया द्वारा प्रशासन के मौन संरक्षण में खुलेआम अवैध उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है।
सारणी थाना क्षेत्र में तवा नदी से बेरोकटोक रेत का अवैध कारोबार संचालित किया जा रहा है। वन विभाग की सीमा में तवा नदी से रेत का खनन कर परिवहन बिना प्रशासन और वन विभाग की मिलीभगत के संभव नजर नहीं आ रहा है। क्षेत्र का तीरभाटा गांव पिछले कई दिनों से रेत माफिया का अड्डा बन गया है। यहां पर बड़े पैमाने पर ट्रैक्टर-ट्राली के माध्यम से तवा नदी से रेत का खनन कर गांव में कई स्थानों पर भंडारण किया जा रहा है। वन विभाग की भूमि पर रेत के बड़े-बड़े ढेर लगा दिए गए हैं। यहां पर शाम होते ही बुलडोजर की मदद से डंपरों में रेत भरने का काम प्रारंभ हो जाता है। अल सुबह तक रेत के डंपरों की आवाजाही लगी रहती है। रेत भरने के बाद डंपर पुलिस थानों, चौकियां और वन विभाग की चौकी के सामने से बेरोकटोक बैतूल, छिंदवाड़ा और महाराष्ट्र की सीमा तक पहुंच रहे हैं। तीरभाटा गांव में गुरुवार को जब 'नवदुनिया' की टीम पहुंची तो रेत का उत्खनन बंद था। गांव में जगह-जगह ट्रैक्टर-ट्राली खड़े हुए थे। गांव के लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया बताया कि दिन के उजाले में तवा नदी से ट्रैक्टर ट्राली के द्वारा रेत निकालकर गांव के बीच में लाकर भंडारित की जाती है। रात में 10 से 15 डंपरों में बुलडोजर से भरी जाती है। बुधवार को एक डंपर पकड़ा जाने के कारण गुरुवार को काम बंद किया गया है। जब आदेश मिलेगा तो रेत का खनन कर भंडारण शुरू कर दिया जाएगा।
प्रशासन नहीं उठा रहा कोई कदम
एक तरफ प्रशासन यह दावा कर रहा है कि रेत का अवैध खनन और परिवहन कहीं नहीं हो रहा है। लेकिन खुलेआम तवा नदी से हो रहे रेत के खनन और परिवहन से प्रशासन के सारे दावे खोखले साबित हो रहे हैं। खैरवानी ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले तीर भाटा गांव में रेत का भंडारण प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहा है। हद तो यह है कि वन परिक्षेत्र सारणी के अंतर्गत आने वाली तवा नदी से रेत का खनन और परिवहन हो रहा है लेकिन वन विभाग द्वारा किसी तरह की कार्यवाही न करने से मिलीभगत के आरोप लगाए जा रहे हैं।लोगों का कहना है कि वन विभाग के संरक्षण के बिना क्षेत्र में रेत का अवैध कारोबार किया ही नहीं जा सकता। सफेदपोश नेताओं और अधिकारियों की मौन स्वीकृति ही रेत के अवैध कारोबार का जीता जागता उदाहरण है। मजे की बात तो यह है कि जो भी ट्रैक्टर, ट्रक या डंपर तवा नदी से रेत भरकर निकलते हैं सभी को वन विभाग के कार्यालय के सामने से ही होकर गुजरना पड़ता है। इसके बाद भी वन विभाग के मैदानी अमले से लेकर अधिकारियों को नजर तक नहीं आ रहे हैं।
त के अवैध कारोबार में जुटे माफिया के द्वारा बेहद सुनियोजित ढंग से अपने काम को अंजाम दिया जा रहा है। 10 से 15 हजार रुपये कीमत की रेत के 50 से 60 हजार रुपये दाम मिलने के कारण गठजोड़ कर अवैध कारोबार संचालित किया जा रहा है। रेत का अवैध परिवहन करने वाले डंपरों को माफिया के द्वारा बैतूल और छिंदवाड़ा जिले की सीमा में जंगल के भीतर दिन में छिपाकर खड़ा कर दिया जाता है। शाम होते ही एक के बाद एक डंपर रेत के भंडारण स्थल पर पहुंचते हैं और रेत भरने के बाद बैतूल या अन्य स्थानों की ओर रवाना कर दिए जाते हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो एक ट्राली में नदी से रेत भरने के लिए मजदूरों को 200 रुपये दिए जाते हैं और उसे परिवहन कर भंडारण स्थल पर पहुंचाने के लिए ट्रैक्टर मालिक को 700 रुपये दिए जा रहे हैं।