Betul News Today - मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में अवैध कोयला खनन का नेटवर्क लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रशासन की सख्ती और समय-समय पर की जाने वाली कार्रवाई के बावजूद शाहपुर, डुल्हारा और चोपना पुनर्वास क्षेत्र इस अवैध गतिविधि के बड़े केंद्र बनते जा रहे हैं। शुरुआत में यह काम तवा नदी के किनारों तक सीमित था, लेकिन अब यह निजी खेतों और सरकारी जमीनों तक फैल चुका है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, खनन माफिया ने कई जगहों पर गहरे गड्ढे खोद रखे हैं, जो देखने में कुओं जैसे लगते हैं। इन्हीं गड्ढों के जरिए जमीन के अंदर मौजूद कोयले तक पहुंच बनाई जाती है। बाद में क्रेन और मशीनों की मदद से कोयला निकालकर ट्रैक्टर-ट्रॉली से जिले और आसपास के इलाकों में सप्लाई किया जाता है।
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बताया जा रहा है कि शाहपुर, घोड़ाडोंगरी, चिचोली और बैतूल के ईंट भट्टों में बड़े पैमाने पर इसी अवैध कोयले का इस्तेमाल हो रहा है। दिन-रात चल रहे इस धंधे ने अब एक संगठित नेटवर्क का रूप ले लिया है, जिसमें स्थानीय लोगों के साथ बाहरी लोगों की भी भूमिका बताई जा रही है।
हाल ही में घोड़ाडोंगरी तहसील के डुल्हारा गांव में तवा नदी किनारे खनिज विभाग की कार्रवाई ने इस मुद्दे को फिर सुर्खियों में ला दिया। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देश पर टीम ने अवैध खनन से बने गड्ढों और सुरंगों को भरकर बंद किया। 31 मार्च को मिली सूचना के बाद निरीक्षण में ताजे गड्ढे और कोयले के निशान मिले थे, जिसके बाद 1 अप्रैल को जेसीबी की मदद से कार्रवाई की गई।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी कार्रवाई ज्यादा असरदार साबित नहीं हो रही। माफिया कुछ समय के लिए रुकते हैं और फिर दूसरी जगहों पर खनन शुरू कर देते हैं। यही वजह है कि यह अवैध कारोबार सालों से जारी है।
पहले भी जिले के अधिकारी खुद इन अवैध खदानों का निरीक्षण कर चुके हैं, जहां छोटे मुहानों से शुरू होकर अंदर कई किलोमीटर लंबी सुरंगें मिली थीं। यह न केवल अवैध नेटवर्क की गहराई दिखाता है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद खतरनाक है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि इस काम में कुछ अनुभवी लोग शामिल हैं, जो पहले कोयला खदानों में काम कर चुके हैं। उनके तकनीकी ज्ञान के कारण माफिया गहराई तक सुरक्षित तरीके से खनन कर पा रहे हैं, जिससे प्रशासन के लिए इसे रोकना और मुश्किल हो गया है।
अवैध खनन से सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है, वहीं पर्यावरण पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है। तवा नदी के आसपास जमीन का कटाव बढ़ रहा है, जल स्रोत प्रभावित हो रहे हैं और खुले गड्ढों से हादसों का खतरा भी बना हुआ है।
खनिज विभाग का कहना है कि निगरानी लगातार की जा रही है और आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि इस संगठित नेटवर्क पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए प्रशासन, पुलिस और स्थानीय लोगों को मिलकर काम करना होगा, तभी इस समस्या का स्थायी समाधान निकल सकता है।
