रायगढ़, 9 जुलाई। महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के खालापुर क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण बड़ा औद्योगिक हादसा सामने आया है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट से करीब 3,000 गैस सिलेंडर तेज बहाव में बहकर पातालगंगा नदी में चले गए। घटना के बाद जिला प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी गैस सिलेंडर को हाथ न लगाने की अपील की है।
बाढ़ के तेज बहाव में बह गए भरे और खाली सिलेंडर
जानकारी के अनुसार, पनवेल तालुका के चवणे स्थित HPCL के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में 9 जुलाई को पातालगंगा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। बाढ़ के तेज बहाव ने प्लांट को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे बड़ी संख्या में भरे हुए और खाली गैस सिलेंडर नदी में बह गए। इससे आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
प्रशासन ने लोगों से की सावधानी बरतने की अपील
खालापुर पुलिस निरीक्षक अभिजीत भुजबल ने घटना की पुष्टि की है। वहीं, रायगढ़ के जिला कलेक्टर किशन जावले ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को नदी या उसके किनारे गैस सिलेंडर दिखाई दे, तो उसे बिल्कुल भी न छुएं और न ही हटाने की कोशिश करें। सिलेंडरों की स्थिति और उनमें गैस होने या न होने की जानकारी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ से गैस रिसाव, आग लगने या विस्फोट जैसी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं।
सिलेंडरों की तलाश में चलाया जा रहा सर्च ऑपरेशन
घटना के बाद जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और HPCL की संयुक्त टीमों ने व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। नदी में बहे सिलेंडरों की तलाश की जा रही है ताकि उन्हें सुरक्षित तरीके से बरामद किया जा सके और किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सके।
लोगों से अपील: सिलेंडर दिखे तो तुरंत दें सूचना
प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें नदी या आसपास किसी स्थान पर गैस सिलेंडर दिखाई दे, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या आपदा प्रबंधन विभाग को इसकी सूचना दें। स्वयं सिलेंडर के पास जाने या उसे उठाने का प्रयास बिल्कुल न करें।
फिलहाल प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि इस औद्योगिक आपात स्थिति से जल्द से जल्द निपटा जा सके।
लगातार हो रही बारिश और बाढ़ के बीच हुई यह घटना इस बात का संकेत है कि औद्योगिक क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान अतिरिक्त सतर्कता और सुरक्षा उपाय कितने आवश्यक हैं।
