Radha Krishan Love Story: हिंदू धर्म में मान्यता है कि राधा अष्टमी व्रत (radha ashtami vrat) के बिना जन्माष्टमी के व्रत (janmashatmi vrat) का फल नहीं मिलता. हिंदू धर्म में राधा अष्टमी का विशेष महत्व है. कहते हैं कि जन्माष्टमी के 15 दिन बाद राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है. राधा अष्टमी पर राधा जी का जन्म (radha ji janam on radha ashtami) हुआ था. इसलिए इस पर्व को भी बड़े-धूम-धाम से मनाया जाता है. इस दिन व्रत रखा जाता है. इस साल राधा अष्टमी 14 सितंबर के दिन मंगलवार को मनाई जाएगी.
हिंदू धर्म में मान्यता है कि राधा रानी की पूजा (radha rani puja) के बिना श्री कृष्ण की पूजा अधूरी रहती है, इसलिए कहते हैं जब श्री कृष्ण के नाम का स्मरण करो, राधा रानी का नाम अवश्य लें. राधा और श्री कृष्ण का प्रेम सबसे पवित्र है. दुनिया में एक आर्दश प्रेम का सुंदर उदाहरण माना जाता है. आइए जानते हैं राधा और कृष्ण के प्रेम के बारे में.
श्रीकृष्ण राधा और अपनी बांसुरी से अटूट प्रेम
कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण राधा और अपनी बांसुरी से अटूट प्रेम करते थे. राधा के अंत समय में वे राधा से मिलने गए. राधा अंत समय में बहुत ही कमजोर हो गई थीं. राधा को इस अवस्था में देखकर श्री कृष्ण की आंखों में पानी आ गए. दोनों एक दूसरे को काफी देर तक निहारते रहे, और मथुरा में साथ बिताए अपने दिनों का याद करते रहे. श्री कृष्ण ने राधा से कुछ मांगने को कहा तो राधा रानी ने कुछ मांगने से साफ मना कर दिया. और कहा कि प्रभु आपने इतना सब कुछ दिया है कि मुझे कुछ मांगने की जरूरत ही नहीं है. बस, आप अपनी मुरली की धुन सुना दो.
क्यों तोड़ी श्री कृष्ण ने बांसुरी
राधा की इच्छा सुनते ही श्री कृष्ण ने अपनी बांसुरी निकाली और बजाने लगे. कृष्ण जी की बांसुरी की धुन सुनते ही राधा मग्न हो गई. वे बांसुरी बजाते रहे. उधर राधा ने बांसुरी की धुन सुनते सुनते अपने प्राण त्याग दिए. ये देख श्री कृष्ण को बहुत दुख हुआ. उनकी आंखों से आंसु ही धारा बहने लगी. राधा को अपनी बाहों में लेकर श्री कृष्ण बहुत देर तक विलाप करते रहे और राधा के जाने के वियोग में श्री कृष्ण ने अपनी बांसुरी तोड़ दी और कभी बांसुरी को अपने होठों से नहीं लगाया.
Radha Ashtami 2021 Puja Vidhi, Katha, Muhurat: हिंदू पंचांग के अनुसार राधा अष्टमी का पर्व हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है इस दिन राधा रानी का जन्म हुआ था। इस साल ये पर्व 14 सितंबर दिन मंगलवार को पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार राधा पानी की पूजा के बिना श्री कृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार राधा अष्टमी का व्रत रखने से मनुष्य को उसके सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है और जीवन में खुशियों का आगमन होता है। जानिए कैसे रखा जाता है राधा अष्टमी व्रत, क्या है इसकी पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व।
राधा अष्टमी पूजा विधि:
व्रत रखने वालों को सुबह सूर्योदय से पहले उठ स्नान कर लेना चाहिए।
इसके बाद राधा रानी की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराना चाहिए।
इसके बाद विधि पूर्वक राधा रानी का श्रृंगार करें।
पूजा स्थल पर एक छोटे से मंडप का निर्माण करें और उसके मध्यभाग में कलश की स्थापना करें।
फिर कलश के ऊपर तांबे की तस्करी रखें।
अब इस पात्र पर राधा रानी की मूर्ति स्थापित करें।
राधा रानी की पूजा के लिए मध्याह्न का मुहूर्त सबसे शुभ माना जाता है।
इस दिन राधा रानी के साथ ही कृष्ण जी की पूजा भी करनी चाहिएराधा अष्टमी व्रत के लाभ: इस दिन सुहागिन स्त्रियां व्रत रखकर राधा रानी की पूजा करती हैं। मान्यता है इस व्रत से सभी प्रकार के दुखों का नाश हो जाता है और महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से भगवान कृष्ण की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। साथ ही धन संबंधी दिक्कतें भी दूर हो जाती हैं।