मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में मौसम ने अचानक करवट बदल ली है, जिससे जहां एक ओर लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं किसानों के लिए यह आफत बनकर सामने आया है। राज्य के कई जिलों में हुई तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि ने खेतों से लेकर खलिहानों तक फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
शिवपुरी में 20 मिनट की ओलावृष्टि ने मचाई तबाही
शिवपुरी जिले के पिछोर क्षेत्र में दिनभर की गर्मी के बाद शाम करीब 5:45 बजे मौसम अचानक बिगड़ गया। तेज हवाओं के साथ घने बादल छा गए और कुछ ही देर में बारिश के साथ ओले गिरने लगे। करीब 20 मिनट तक चली इस ओलावृष्टि ने पूरे इलाके को पानी-पानी कर दिया।
इस दौरान खेतों में खड़ी रबी की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। हालांकि, अभी तक नुकसान का सटीक आंकलन नहीं हो पाया है, लेकिन किसानों के चेहरे पर चिंता साफ देखी जा सकती है। कटाई के लिए तैयार फसलें इस बेमौसम बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं।
बैतूल में आंधी-तूफान से जनजीवन अस्त-व्यस्त
बैतूल (Betul) जिले में भी तेज आंधी और बारिश ने तबाही मचा दी है। खासकर देवठान गांव में तूफान का असर ज्यादा देखने को मिला। तेज हवाओं के कारण कई घरों की टीन और खपरैल की छतें उड़ गईं।
ग्रामीणों के अनुसार, अचानक आए इस तूफान से लोग घबरा गए और सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। खेतों में रखी गेहूं की फसल बारिश और हवा के कारण खराब हो गई। इसके अलावा टमाटर और अन्य सब्जियों की फसल को भी भारी नुकसान हुआ है।
किसानों का कहना है कि उनकी कई महीनों की मेहनत कुछ ही मिनटों में बर्बाद हो गई। इसके साथ ही बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई है—कई खंभे झुक गए और तार टूट गए।
विदिशा और सीहोर में ओलों की मार, फसलें बर्बाद
विदिशा और सीहोर जिलों में भी मौसम का कहर देखने को मिला। बुधवार शाम अचानक तेज हवाएं, गरज-चमक और ओलावृष्टि शुरू हो गई। नटेरन और गुलाबगंज क्षेत्र के कई गांव इस आपदा की चपेट में आए।
गुलाबगंज के अंडिया कला गांव में गेहूं, चना और सरसों की फसल को भारी नुकसान हुआ है। वहीं नटेरन के परसोरा, आमऊखेड़ी और दिताखेड़ी गांवों में भी किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं।
सीहोर में तेज हवाओं (लगभग 30 किमी/घंटा) के कारण खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जमीन पर गिर गई, जिससे उत्पादन में कमी की आशंका है।
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मौसम विभाग का अलर्ट: अगले 3 दिन भारी
मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश के लगभग 30 जिलों में अगले तीन दिनों तक आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का असर बना रह सकता है। खासकर सिवनी, मंडला और बालाघाट जिलों में ओले गिरने की संभावना जताई गई है।
हालांकि विंध्य क्षेत्र के कुछ जिलों में इसका असर कम देखने को मिला है, जिससे वहां फसलों को अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ है।
फसलों का नुकसान: अभी आंकलन बाकी
फिलहाल, फसलों के नुकसान का सही आंकलन नहीं हो पाया है, लेकिन प्राथमिक रिपोर्ट्स के अनुसार नुकसान काफी बड़ा हो सकता है। खेतों के साथ-साथ खलिहानों में रखी फसलें भी बारिश से खराब हुई हैं।
किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए तिरपाल का सहारा ले रहे हैं, लेकिन लगातार खराब मौसम से स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
किसानों ने सरकार से लगाई मदद की गुहार
इस प्राकृतिक आपदा के बाद किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द सहायता नहीं मिली, तो उन्हें भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
