मंत्रालय के अनुसार, यह योजना पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया के माध्यम से लागू की जाएगी, जिससे पात्र नियोक्ता अपने लंबित मामलों का आसानी से निपटारा कर सकेंगे।
योजना छह महीने तक रहेगी लागू
सरकार ने इस योजना को EPF Scheme, 2026 के तहत अधिसूचित किया है। अधिसूचना जारी होने की तारीख से यह योजना छह महीने तक प्रभावी रहेगी।
योजना का उद्देश्य
'विश्वास 2026' का मुख्य उद्देश्य है:
नियोक्ताओं को स्वेच्छा से नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करना।
लंबे समय से लंबित विवादों का शीघ्र समाधान करना।
न्यायालयों में चल रहे मामलों और मुकदमों की संख्या कम करना।
कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
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किन मामलों को मिलेगा लाभ?
यह योजना निम्नलिखित मामलों पर लागू होगी:
जिन मामलों में डैमेज या पेनल्टी का आदेश न्यायालय या अन्य न्यायिक मंच पर चुनौती के अधीन है।
ऐसे अंतिम आदेश जिनकी वसूली अभी लंबित है या आंशिक रूप से ही हुई है, जिसमें Recovery Certificate (RRC) वाले मामले भी शामिल हैं।
जिन मामलों में नोटिस जारी हो चुका है लेकिन अंतिम आदेश अभी पारित नहीं हुआ है।
ऐसे मामले जिनमें अभी तक डैमेज या पेनल्टी का नोटिस जारी नहीं किया गया है।
पेनल्टी और डैमेज की नई रियायती दरें
14 जून 2024 से पहले की अवधि से संबंधित डिफॉल्ट मामलों में डैमेज या पेनल्टी की पुनर्गणना (Recalculation) निम्न रियायती दरों पर की जाएगी:
2 महीने तक की देरी: 0.25% प्रति माह
2 महीने से अधिक लेकिन 4 महीने से कम की देरी: 0.50% प्रति माह
4 महीने से अधिक की देरी: 1% प्रति माह
सरकार का कहना है कि इन रियायती दरों का उद्देश्य नियोक्ताओं को लंबित विवादों का जल्द समाधान करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
क्या होगा फायदा?
इस योजना के लागू होने से नियोक्ताओं को पुराने विवादों का कम लागत में निपटारा करने का अवसर मिलेगा, जबकि EPFO को भी लंबित मामलों के शीघ्र समाधान में मदद मिलेगी। इससे कानूनी विवाद कम होंगे और कर्मचारियों के भविष्य निधि संबंधी हित भी सुरक्षित रहेंगे।
