होशंगाबाद - अजब पेड़ की गजब कहानी हाथ रखते ही उड़न छू हो जाती बीमारी होशंगाबाद के पिपरया सतपुड़ा टाइगर रिसर्व छेत्र की का एक महुए का पेड़ इन दिनों आस्था का केंद्र बना हुआ है इस पेड़ की मान्यता है की इसे छूते ही मरीजों को तुरंत ही आराम मिल जाता है।
माना जा रहा है की यह कोई कोई ऐसा वैसा पेड़ नहीं है बल्कि एक चमत्कारी पेड़ है जिसको छूने मात्रा से व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है इन्ही अपनी दिव्य शक्तिओ के कारण इन दिनों यह पेड़ सुर्खियों में है। क्या अपने कभी किसी ऐसी पेड़ के बारे में सुना है की किसी पेड़ को छूने मात्रा से बीमारी छू मंतर हो जाये तो नहीं न तो हम आपको आज बतायेगे की होशंगाबाद के पिपरिया से लगे सतपुड़ा टाइगर रिसर्व सिमा से सटे 15 km दुरी पर एक गांव है , जहां पर एक महुए का पेड़ इसी पेड़ को छूने से व्यक्ति स्वस्थ होने की बात कही जा रही है। कहते है जंगल में आग लगे और बात न फैले भला कभी ऐसा हुआ है क्या इसी प्रकार यह बात फैलते गयी और वहा आज रोज हजारो की संख्या में लोग पहुंच रहे है इसी प्रकार महज कुछ दिनों में यह जगह आस्था का केंद्र बन गयी। हालाँकि हम इसकी पुस्टि नहीं करते है परन्तु कहते है आस्था हो तो पत्थर में भी भगवान मिल जाते है इसी प्रकार आस्था को प्रमाण की आवस्यकता नहीं होती है।
माना जा रहा है की यह कोई कोई ऐसा वैसा पेड़ नहीं है बल्कि एक चमत्कारी पेड़ है जिसको छूने मात्रा से व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है इन्ही अपनी दिव्य शक्तिओ के कारण इन दिनों यह पेड़ सुर्खियों में है। क्या अपने कभी किसी ऐसी पेड़ के बारे में सुना है की किसी पेड़ को छूने मात्रा से बीमारी छू मंतर हो जाये तो नहीं न तो हम आपको आज बतायेगे की होशंगाबाद के पिपरिया से लगे सतपुड़ा टाइगर रिसर्व सिमा से सटे 15 km दुरी पर एक गांव है , जहां पर एक महुए का पेड़ इसी पेड़ को छूने से व्यक्ति स्वस्थ होने की बात कही जा रही है। कहते है जंगल में आग लगे और बात न फैले भला कभी ऐसा हुआ है क्या इसी प्रकार यह बात फैलते गयी और वहा आज रोज हजारो की संख्या में लोग पहुंच रहे है इसी प्रकार महज कुछ दिनों में यह जगह आस्था का केंद्र बन गयी। हालाँकि हम इसकी पुस्टि नहीं करते है परन्तु कहते है आस्था हो तो पत्थर में भी भगवान मिल जाते है इसी प्रकार आस्था को प्रमाण की आवस्यकता नहीं होती है।
