महाराष्ट्र - बीजेपी और शिवसेना के गढ़बंधन के टूटने के बाद किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत न होने की स्तिथि में राजयपाल महोदय ने बीजेपी को पहली सबसे बड़ी पार्टी होने की स्तिथि में सरकार बनाने के लिए आमंत्रण दिया और अपना बहुमत साबित करने को कहा लेकिन बीजेपी ने पूर्ण बहुतमत न होने की स्तिथि में सरकार बनाने से मन कर दिया। बीजेपी के मन करते ही राजपाल महोदय द्वारा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जिसके लिए शिवसेना को 24 घंटे का वक़्त दिया गया परन्तु शिवसेना दिए गए वक़्त में एनसीपी और कांग्रेस का सहमति पत्र राज्यपाल महोदय के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर पायी जिसके बाद शिवसेना के ओर से मुख्यमंत्री के बनने पर घनघोर बादल छा गए।
शिवसेना के बहुमत साबित न होने की दशा में राज्यपाल द्वारा एनसीपी को न्योता दिया गया है जिसके लिए उन्हें भी २४ घंटो का समय मिला है इन समय में उन्हें कांग्रेस और शिवसेना को समर्थन के लिए सहमत करना होगा। परन्तु इन सब को देखते हुए कहा जा सकता है की शिवसेना अपना मुख्यमंत्री बनाने के लिए किसी को भी समर्थन दे सकती है बस शर्त है की मुख्यमंत्री उनकी पार्टी का होगा इस जोड़ तोड़ की राजनीती से पता चलता है कि इसमें जनता के वोट की कोई कीमत नहीं है। शिवसेना अपना मुख्यमंत्री बनाने के लिए 30 सालो की दोस्ती भी तोड़ सकती है और और उनका भी समर्थन कर सकती है जिनकी विचारधारा शिवसेना की विचारधारा से बिलकुल अलग है।
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