जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश चंद्र थपलियाल ने आरोपी सोनू उर्फ मनक उइके को आजीवन कारावास के साथ ₹3,000 के अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना न भरने पर आरोपी को एक साल की अतिरिक्त सश्रम कैद भुगतनी होगी।
क्या था पूरा मामला?
लोक अभियोजक नितिन मिश्रा के अनुसार, यह दर्दनाक वारदात 1 जून 2025 को बैतूल बाजार थाना क्षेत्र की है।
विवाद की वजह: दोपहर करीब 3:30 बजे आरोपी सोनू अपने खेत पर बने मकान में मौजूद था। वह शराब के नशे में धुत था। गेहूं बेचने की बात को लेकर उसका अपनी पत्नी बसंती से झगड़ा शुरू हो गया।
जानलेवा हमला: बात इतनी बढ़ी कि आरोपी ने लकड़ी का डंडा उठाकर अपनी 3 माह की गर्भवती पत्नी पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। सिर और शरीर पर गंभीर चोटें लगने से बसंती ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
मासूम बच्चों ने नाना के घर पहुंचकर बताई आपबीती
घटना के वक्त दंपती के दोनों छोटे बच्चे घर में ही मौजूद थे। आंखों के सामने पिता का खौफनाक रूप देखकर बच्चे बुरी तरह डर गए। वे तुरंत भागकर पास में ही रहने वाले अपने नाना के घर पहुंचे और पूरी घटना की जानकारी दी।
पिता दीवार के सहारे बेसुध मिली बसंती:
मृतका के पिता गणेश जब भागे-भागे मौके पर पहुंचे, तो आरोपी सोनू हाथ में डंडा लिए घर के बाहर खड़ा था। घर के अंदर बसंती दीवार से टिकी पड़ी थी, जिसके सिर और मुंह से लगातार खून बह रहा था।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने महिला को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने उसी दिन आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।
बच्चों की गवाही बनी न्याय की सबसे बड़ी वजह
मामले की जांच उप निरीक्षक रामस्वरूप रघुवंशी ने की। पुलिस ने घटनास्थल से मिले वैज्ञानिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयान जुटाकर मजबूत चालान कोर्ट में पेश किया।
सुनवाई के दौरान अदालत में दोनों मासूम बच्चों के बयान दर्ज कराए गए। बच्चों ने बिना डरे पूरी वारदात का आंखों देखा हाल सुनाया। कोर्ट ने मासूमों के बयान को बेहद विश्वसनीय माना। मेडिकल रिपोर्ट और लोक अभियोजक नितिन मिश्रा की प्रभावी पैरवी के चलते आरोपी को सख्त सजा दिलाई जा सकी।
